योग एक ऐसा माध्यम होता है जो की शरीर को स्वस्थ रखता है और उसे ऊर्जा से भर देता है। साथ ही रोगों से भी कोसो दूर रखता है।उर्ध्वोत्तानासन में उर्ध्व यानी ऊपर और तान का मतलब होता है तानना जिसका सम्पूर्ण अर्थ होता है शरीर को ऊपर की तरफ तानना। इस आसन को खड़े होकर किया जाता है।

यदि आप अपने कद को लेकर परेशान है तो उसे भी योग के माध्यम से दूर कर सकते है। उर्ध्वोत्तानासन को प्रतिदिन करने से व्यक्ति के कद में वृद्धि होती है।

उर्ध्वोत्तानासन रीढ़ विकृतियों को दूर करने में भी सहायता करता है। मधुमेह के रोगियों के लिए यह एक लाभकारी आसन होता है।साथ ही इसे करने से दिमाग शांत रहता है ।

ड्रॉपिंग शोल्डर और नैरो चेस्ट की स्थिति में भी उर्ध्वोत्तानासन को करना लाभकारी होता है। जानते है Urdhva Uttanasana करने की विधि और इसे करने से होने वाले लाभकारी फायदों के बारे में।

Urdhva Uttanasana: जानिए इसे करने की विधि और उसके फायदे

Urdhva Uttanasana in Hindi

उर्ध्वोत्तानासन को करने की विधि

  • उर्ध्वोत्तानासन को करने के कई तरीके होते है जानते है इसे करने का सरल तरीका।
  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले सावधान की स्थिति में खड़े हो जाए।
  • ध्यान रहे की खड़े होते समय पीठ, डेढ़ की हड्डी और गर्दन एक ही सीध में हो।
  • इस स्थिति में साँस लेने की प्रक्रिया सामान्य ही रहेगी।
  • अब साँस को अंदर लेते हुए अपने कंधे को पीछे की तरफ करे और हाथों को धीरे धीरे साईड से ऊपर की तरफ उठायें।
  • और जब हाँथ कंधे की सीध में आये तो हांथो की हथेलियों को आकाश की तरफ करते हुए हाथों को कान से सटा लें।
  • इसके बाद कोहनियों को मोड़े और विपरीत भुजाओं को पकड़ लें। साथ ही अपनी गर्दन को नीचे की तरफ झुकाएं।
  • इतना करने के बाद पंजे के बल ऊपर की ओर उठे और एड़ियों को ऊपर उठायें।
  • इसके बाद साँस को लेते हुए अपने पंजो पर दवाब डाले। साथ ही जांघ की मांसपेशियों को ऊपर की तरफ खींचे।
  • अब नितंब को कसावट देते हुए नाभि को अंदर करे, सीना बाहर करके पूरी साँस भर लें।
  • साँस की प्रक्रिया को इस स्थिति में भी सामान्य ही रखे।
  • जब आप जांघ की मांसपेशियों को ऊपर उठाएंगे तो घुटना भी ऊपर की तरफ जायेगा। इसमें ध्यान रखना है की घुटना ऊपर की तरफ ही जाए न की पीछे की तरफ।
  • इसके बाद साँस को धीरे धीरे छोड़ते हुए नाभि को संकुचित कर ले और उड्डीयन बंध लगाने के बाद मूलबंध को भी लगा लें।
  • इसके बाद कुंभक की मुद्रा में कुछ देर रुके।
  • इसके बाद अपनी प्रारंभिक अवस्था में वापस आ जाएँ ।
  • वापस आने के लिए धीरे-धीरे बंध खोलते जाएँ और वापस प्रारंभिक स्थिति में आ जाएँ ।

उर्ध्वोत्तानासन को करने के फायदे

  • उर्ध्वोत्तानासन के नियमित अभ्यास से शरीर की लम्बाई बढ़ती है।
  • यह आसन मोटापे को कम करने और शरीर में जमे एक्स्ट्रा फैट को निकालने का कार्य करता है।
  • पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है और पेट से सम्बंधित बीमारियों को भी दूर करता है।
  • यदि किसी व्यक्ति के पैरो में कमज़ोरी होती है तो उसे भी दूर करने के लिए उर्ध्वोत्तानासन करना अच्छा होता है।