Utthita Trikonasana: ऑस्टियोपोरोसिस को दूर करे, पैर और गर्दन को मजबूत बनाये

उत्थित त्रिकोणासन को Extended Triangle Pose के नाम से जाना जाता है। यह तीन शब्दों से मिलकर बना है उत्थित, त्रिकोण और आसन। जिसमे उत्थित यानी उठा हुआ, त्रिकोण अर्थात त्रिभुज और आसन का मतलब योग मुद्रा होता है।

उत्थित त्रिकोणासन को खड़े होकर किया जाता है। इस आसन द्वारा कूल्हों, हैमस्ट्रिंग्स और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। साथ ही यह छाती और कंधों को भी खोलने में मददगार साबित होता है और स्वास्थ्य को बहुत सारे लाभ पहुँचाता है।

उत्थित त्रिकोणासन को करने के लिए संतुलन और लचीलेपन की आवश्यकता होती है। इसलिए अगर आप रोज़ाना इस आसान का नियमित तौर पर अभ्यास करते रहेंगे तो आप इसे धीरे धीरे अच्छे से करने में सक्षम हो जायेंगे। साथ ही इससे प्राप्त होने वाले स्वास्थ्य लाभ का भी फायदा उठा पाएंगे।

तो चलिए आज के इस लेख में अब जानते है Utthita Trikonasana in Hindi को करने की विधि क्या है और इससे आप क्या क्या फायदे प्राप्त कर सकते है आदि जानकारियां विस्तार में ताकि आपक खुद इसे अपने घर पर कर पाएं और इसके फायदे उठा पाएं। पढ़ें Utthita Trikonasana.

Utthita Trikonasana: जानते हैं इस आसान की करने विधि तथा इसके लाभ और सावधानियां

Utthita Trikonasana

उत्थित त्रिकोणासन को करने का तरीका

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले ताड़ासन की मुद्रा में खड़े हो जाए और साँस को अंदर ले।
  • फिर 3 से 4 फ़ीट तक पैरो के बीच में दूरी बना ले।
  • इसके बाद पैर को 10 से 20 दर्जे के अंदर मोड़े और दाहिने पैर को 90 डिग्री बाहर की तरफ मोड़े।
  • फिर बायीं एड़ी के साथ दाहिनी एड़ी को संरेखित करे।
  • फिर धीरे से अपने हाथ को ऊपर उठाये। यह आप तब तक उठाये जब तक की आपका हाथ कंधे की सीध में ना आ जाये।
  • ध्यान रहे इसमें आपकी अंगुलियों की दिशा आसमान की तरफ होनी चाहिए।
  • अब साँस छोड़ते हुए अपने सिर को दाहिनी तरफ मोड़े। ध्यान रहे की आपका सिर दाहिनी पैर की सिधाई में आना चाहिए।
  • इसमें याद रहे की आपको पैरो के जोड़ों से मुड़ना है न की कूल्हों के जोड़ों से।
  • यदि शुरुआत में आपको संतुलन बनाने में कठिनाई आ रही है तो धीरे धीरे सिर को नीचे की तरफ लाये।
  • धीरे धीरे जैसे ही शरीर का लचीलापन बढ़ेगा आप संतुलन आसानी से बना पाएंगे।
  • इसके बाद अपने दाहिने हाथ को अपनी क्षमता के अनुसार दाहिने पैर से बाहर की ओर फर्श पर या फिर टखनों पर या घुटनो पर रखे।
  • इसमें ध्यान रहे की आपका सिर और दाहिना पैर एक सीध में रहे।
  • अपने बाए हाथ को छत की ओर बढ़ाये। अब आपके दोनों हाथ और छाती एक सीध में होने चाहिए।
  • इसके बाद अपने सिर को ऊपर की ओर उठाये ताकि आप अपने बाए हाथ की अंगुलियों को देख पाए।
  • इसके बाद लगभग पांच बार साँस को अंदर और बाहर की तरफ छोड़े।
  • ऐसे में आप इस आसन में 30 से 60 सेकंड तक रह पाएंगे। धीरे धीरे अपनी क्षमता के अनुसार इसका समय 90 सेकंड तक बड़ा सकते है।
  • पांच बार साँस लेने के बाद इस आसन से बाहर आ सकते है। आसन से बाहर आते समय सिर को सीधा कर ले।
  • बाए हाथ को नीचे कर ले और पैरो को वापस अंदर की तरफ ले आये।
  • यह एक चक्र पूरा हुआ अब इसे बाए ओर से भी करे।

उत्थित त्रिकोणासन को करने के फायदे: Utthita Trikonasana Benefits

महिलाओ के लिए फ़ायदेमंद

  • यह आसन महिलाओ के लिए बहुत लाभकारी होता है।
  • इस आसन को करने से महिलाओ को रजोनिवृत्ति के लक्षणों में राहत मिल जाता है।
  • साथ ही यदि गर्भवती महिलाएं अपने गर्भावस्था के दूसरी तिमाही में इस आसन का अभ्यास करती है तो उन्हें पीठ दर्द की समस्या नहीं होती है।

पेट के लिए लाभकारी

  • यह आसन पेट के लिए भी बहुत लाभकारी होता है।
  • इस आसन को करने से पेट के अंग उत्तेजित होते है जिससे पेट से जुड़ीं समस्याएं नहीं होती है और पाचन क्रिया अच्छे से होती है।
  • पाचन तंत्र सुचारु रूप से कार्य करता है।

तनाव से राहत दिलाए

  • आजकल तनाव के चलते कई बीमारियाँ हो जाती है। जिस कारण तनाव को दूर करना बहुत ज़रुरी हो गया है।
  • तनाव में रहने से व्यक्ति अपने कामों को भी सही ढंग से नहीं कर पाता है और तनाव का असर उसके शरीर पर भी पड़ता है।
  • इसलिए तनाव को दूर करने के लिए इस आसन का नियमित अभ्यास करना अच्छा होता है।
  • यह आसन तनाव से मुक्ति दिलाने में मदद करता है।

शरीर के अंगो में खिचाव लाये

  • उत्थित त्रिकोणासन को करने से शरीर के कई हिस्सों में खिचाव उत्पन्न होता है।
  • इस आसन को करने से टखनों, पैरो और जांघो को मजबूती मिलती है साथ ही उनमे खिचाव भी होता है।
  • यह आसन छाती, कंधे, रीढ़ की हड्डी, कूल्हों, हैमस्ट्रिंग आदि में भी खिचाव लाता है।

अन्य लाभ

  • यह चिंता, बांझपन, फ्लैट पैर, गर्दन का दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस, कटिस्नायुशूल के लिए उपयोगी होता है।
  • उत्थित त्रिकोणासन के अभ्यास से पीठ दर्द से राहत मिलती है इसलिए इसका नियमित अभ्यास करना अच्छा होता है।

उत्थित त्रिकोणासन से पहले करने वाले आसन

उपरोक्त आसनो को आप उत्थित त्रिकोणासन करने से पहले कर सकते है।

उत्थित त्रिकोणासन के बाद किये जाने वाले आसन

  • प्रसारित पादोत्तासन
  • उत्थित पार्श्वकोणासन
  • पर्श्वोत्तनासन
  • परिवृत्त त्रिकोणासन

उपरोक्त आसनो को आप उत्थित त्रिकोणासन के बाद कर सकते है इनका अभ्यास करना भी फ़ायदेमंद होता है।

उत्थित त्रिकोणासन को करते समय ध्यान देने योग्य सावधानियां

  • इस आसन को करने के लिए अपनी क्षमता के अनुरूप से जोर लगाए उससे अधिक करने का प्रयास न करे।
  • सर दर्द और दस्त की स्थिति में इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • यदि किसी को दिल से सम्बंधित कोई समस्या है तो इस आसन का अभ्यास किसी दीवार के सहारे कर सकते है। साथ ही इसे किसी कुशल प्रशिक्षक की निगरानी में ही करे।
  • गर्दन में दर्द होने पर इस आसन में गर्दन पर ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए। आप गर्दन को सीधा रख सकते है।
  • यदि आपको हाई बीपी की समस्या है तो अपने सर को ऊपर की ओर नहीं ले जाना चाहिए।
  • यदि आप गर्भावस्था में इस आसन का अभ्यास कर रही है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में जरूर बात करे। ताकि आपको वह आपके स्थिति के अनुसार सही राय दे सके।

नोट – उत्थित त्रिकोणासन आसन का अभ्यास नियमित रूप से करे यह तभी फ़ायदेमंद होगा। यदि आप इस आसन को करने के लिए नए है तो आपको इस आसन का अभ्यास किसी प्रशिक्षक की उपस्थिति में करना चाहिए ताकि आप इसे सही ढंग से कर पाएंगे।

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