चिकित्सीय और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें वज्रोली मुद्रा द्वारा

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चिकित्सीय और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें वज्रोली मुद्रा द्वारा

अभी तक हमने आपको बहुत सी क्रियायों और मुद्राओं के बारे में बताया है| आज हम आपको वज्रोली मुद्रा के बारे में बताने जा रहे है| योग के अनुसार, यह प्रणयन और क्रिया दोनों ही है| इस मुद्रा के अभ्यास से हम पाचन और योन संबंधी समस्या का समाधान पा सकते है| इस क्रिया को हठयोग के अंतर्गत भी किया जा सकता है|

हठयोग की क्रियायों में उन स्थानों की सफाई की जाती है, जहां मल या गंदगी जमा रहती है या रुकी रहती है| इस शारीरिक स्वस्छता के बाद षट्चक्र वेधन की अन्य अभिवर्धन क्रियाएं की जाती है| नाड़ी शोधन के उपरांत ही अभिवर्धन क्रियाओं को प्रारम्भ करने के नियम है|

इसकी सभी क्रियाएं प्रतिरोधक है| जिस प्रकार नदी के प्रवाह को रोककर बांध बनाया जाता है और बाद में उसे बिजली और नहर बनाई जाती है| उसी प्रकार से हठयोग में भी होता है| इसमें सामान्य क्रिया कलापों को उल्टा किया जाता है जैसे मल - मूत्र त्यागने वाले  छिद्र स्वाभाविक स्थिति में अपने प्रवाह को निचे की तरफ बहाते है परन्तु वज्रोली क्रिया में यह जल को निचे से ऊपर की तरफ खींचने का काम करते है| आइये जानते है Vajroli Mudra in Hindi.

Vajroli Mudra in Hindi: जानिए इसकी विधि और लाभ

Vajroli Mudra in Hindi

वज्रोली क्रिया को दो प्रकार से किया जा सकता है| यहाँ हम आपको दोनों ही तरीके बता रहे है| आइये जानते है Vajroli Mudra Steps-

पहली विधि

  1. किसी भी ध्यानात्मक आसन पद्मासन या सुखासन में बैठ जाएँ |
  2. दोनों हाथ घुटनों पर रखें और आँखे को बंद कर ले तथा नाक से साँस लेते रहे|
  3. अन्तः कुम्भक करें अर्थात साँस अन्दर रोककर रखें, इस स्थिति में गुदाद्वार एवं अंडकोष के बीच के भाग को उपर की तरफ संकुचित करें|
  4. इसके बाद साँस को बाहर निकालकर पेट को शिथिल करते हुए पेट के नीचे के भाग को इस तरह से खींचे जैसे मल-मूत्र के वेग को रोकते समय खींचते हैं|
  5. जितनी देर इस स्थिति में रह सकते है रहें और फिर सामान्य स्थिति में आ जाएँ| इस क्रिया को 10-20 बार दोहराएं|

दूसरी विधि

  1. वज्रोली मुद्रा की दूसरी विधि हठयोग के अंतर्गत आती है,इस क्रिया के प्रारंभ में रबड़ का एक कैथेटर मूत्र मार्ग में प्रतिदिन एक-एक इंच बढ़ाते हुए 10-12 इंच तक प्रवेश कराया जाता है|
  2. इसके बाद चांदी या कांच की नली को मूत्रमार्ग में 10-12 इंच तक प्रवेश कराया जाता है|
  3. यह क्रिया हो जाने पर इस नली से जल को अंदर खींचने का अभ्यास किया जाता है| जल खींचने का अभ्यास हो जाने पर, दूध,शहद और पारा को खींचने का अभ्यास सिद्ध किया जाता है|
  4. यह बहुत ही कठिन क्रिया है इसलिए इसे योग्य गुरु के निर्देशन के अनुसार तथा उनकी उपस्थिति में ही करने चाहिए| इस बात का विशेष ध्यान रखें
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Vajroli Kriya में यही करना होता है| साँस को ऊपर चढ़ाते हुए गुदा क्षेत्र की समस्त मांसपेशियों को पैर की तरफ इस प्रकार चढ़ाया जाता है कि मानो पिचकारी द्वारा पानी को ऊपर खींचा जा रहा है|

Vajroli Mudra Benefits: जानिए इसके लाभ

  1. इस क्रिया के अभ्यास से समय से पूर्व होने वाली वीर्य स्त्राव और स्वप्नदोष की समस्या में लाभ मिलता है|
  2. इस मुद्रा के अभ्यास से शरीर की शक्ति, सुंदरता एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है|
  3. वज्रोली क्रिया की दूसरी विधि सिद्ध हो जाने पर व्यक्ति अलौकिक शक्तियां प्राप्तकर सकता है|
  4. कुंडलिनी को जागृत करने में भी इस मुद्रा का विशेष महत्त्व होता है|
  5. यह क्रिया प्रजनन संस्थान को सबल बनाती है और यौन रोग में भी व्रजोली मुद्रा फायदेमंद है|

आज हमने आपको Vajroli Mudra in Hindi, को करने की विधि और इससे होने वाले चिकित्सीय और आध्यात्मिक लाभो के सन्दर्भ में सम्पूर्ण जानकारियां दी है| जो आपके लिए बहुत फलदायक है, लेकिन इस मुद्रा का अभ्यास घर पर करने से पूर्व, इसे किसी योग्य योग शिक्षक द्वारा अच्छी तरह सीखें, उसके बाद ही इनका अभ्यास करें| क्योंकि जरा सी गलती से इसका विपरीत असर भी हो सकता है|