Vasisthasana: हाथों, कलाई व पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाला आसन

Go to the profile of  Yogkala Hindi
Yogkala Hindi
1 min read
Vasisthasana: हाथों, कलाई व पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाला आसन

वशिष्ठासन को अंग्रेजी भाषा में साइड प्लैंक पोज़ भी कहा जाता है। यह आसन शरीर कि चर्बी को कम करने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है।

इस आसन का नाम ऋषि वशिष्ठ के नाम पर रखा गया है, जो कि सप्तऋषि मंडल के एक ऋषि हैं। उन्हें भारत वर्ष के सबसे सम्माननीय संतो में से माना जाता है।

इस आसन द्वारा शरीर के ऊपरी हिस्से जैसे छाती, पेट और कंधे मज़बूत बनते है और उसमे स्थिरता आती है। यह आसन बाहों के संतुलन के लिए भी अच्छा होता है।

इसके नियमित अभ्यास से शरीर में स्थिरता आने के अतिरिक्त एकाग्रता में भी वृद्धि होती है। जानते है Vasisthasana को करने कि विधि, उसके फायदे और बरतने योग्य सावधानियां।

Vasisthasana Yoga: जानिए वशिष्ठासन को करने का तरीका और लाभ

Vasisthasana in Hindi

वशिष्ठासन को करने कि विधि

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले एक आसन पर दंडासन कि मुद्रा में आ जाए।
  • इसके बाद धीरे से अपने शरीर का सारा वज़न अपने दाएँ हाथ और पैर पर रखें।
  • ऐसा अनुभव होना चाहिए कि आपका बाया हाथ और पैर हवा में हो।
  • अब अपने बाए पैर को दाहिने पैर पर रखें और बाए हाँथ को अपने कूल्हे पर रखें।
  • ध्यान रखे कि आपका दाहिना हाथ आपके कंधे के साथ होना चाहिए, और वह आपके कंधे के नीचे न हो।
  • याद रखे कि आपके हाथ ज़मीन को दबाएँ और आपके हाथ एक सीध में हो।
  • इसके बाद साँस अंदर लेते हुए अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाएँ। ऐसा प्रतीत हो कि आपका हाथ ज़मीन पर सीधा खड़ा हुआ है।
  • अब अपनी गर्दन को अपने उठे हुए हाथ की तरफ मोड़ें और साँस को अंदर और बाहर करते हुए अपनी हाथों की उँगलियों कि तरफ देखें।
  • फिर साँस छोड़ते हुए अपने हाथ को नीचे ले आएँ।
  • अब पुन : दंडासन में आ जाए, यह एक चक्र पूरा हुआ।
  • यही प्रक्रिया दूसरे हाथ के साथ भी दोहराए।

वशिष्ठासन के फायदे

  • इस आसन द्वारा हाथों, कलाई व पैरों की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।
  • वशिष्ठासन पेट की मासपेशियों को भी मज़बूत बनाता है।
  • यह आसन जांघों और कमर के मोटापे को कम करता है।
  • वशिष्ठासन कलाई की चौड़ाई को बढ़ाता है और मजबूत करता है।

वशिष्ठासन कि सावधानिया

  • यदि कंधे और कोहनी में कोई गहरी चोट है तो इस आसन को ना करे।
  • अगर कलाई में चोट है तो भी इस आसन को ना करे।
  • महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान वशिष्ठासन नहीं करना चाहिए।
  • इस आसन को बहुत ही आराम के साथ किया जाना चाहिए।
  • शुरुवात में योग अध्यापक कि निगरानी में ही इसका अभ्यास करे।
इस आसन को करने से पहले सुप्तवीरासन, सुप्त पादांगुष्ठासन, प्लैंक पोज़ और अर्ध चन्द्रासना को कर सकते है। साथ ही वशिष्ठासन के बाद अधोमुख श्वान आसन और शीर्षासन को कर सकते है।