Vrischikasana Yoga - शरीर में संतुलन लाये तथा तनाव से निजात दिलाये

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Vrischikasana Yoga - शरीर में संतुलन लाये तथा तनाव से निजात दिलाये

हम जानते है की बड़ी से बड़ी असाध्य बीमारियों से लड़ने के लिए  योग का सहारा लिया जाता है। क्यूंकि योग कई प्रकार के रोगो से मुक्ति दिलाता है। यह एक ऐसी कला है जिसके अनेक फायदे है।

हर उम्र के लोग योग का अभ्यास कर सकते है। खास बात तो यह है की इसका साइड एफ्फेक्ट भी नहीं होता है| आज हम आपको योग के कई आसनो में से वृश्चिकासन के बारे में बता रहे है|

वृश्चिक अर्थात बिच्छू। इस आसन को करने में व्यक्ति की आकृति  बिच्छू के समान हो जाती है इसीलिए इसे वृश्चिकासन (Scorpion Pose) कहा जाता हैं। वृश्चिकासन पेट की चर्बी को कम करने के लिए बहुत ही असरकारी आसन होता है।

यदि आप फर्स्ट टाइम इसका अभ्यास कर रहे है तो इस आसन को करने में कठिनाई जाएगी। परन्तु धीरे धीरे अभ्यास से यह आसन करने में आसान हो जायेगा। आइये जानते है Vrischikasana को करने की विधि और इसके फायदे क्या है?

Vrischikasana Yoga: जानिए इसे करने की विधि, लाभ और सावधानिया

Vrischikasana in Hindi

वृश्चिकासन की विधि

  • वृश्चिकासन करने के लिए सबसे पहले किसी भी दीवार के पास एक आसन बिछाकर उसपर बैठ जाए।
  • इसके बाद अपने दोनों हांथो के बीच अंतर रखते हुए उनकी हथेलियों को और कोहनी को जमीन पर टिका ले।
  • फिर दूसरी ओर घुटनों को भूमि पर टिका कर किसी चौपाये के समान आकृति बना ले।
  • ध्यान रहे की इस स्थिति में आपका मुंह दिवार की ओर होना चाहिएI
  • फिर सिर को हांथो के मध्य टिकाकर पैरो को ऊपर ले जाये और सीधा करते हुए घुटनों से मोड़े और दीवार पर टिका ले |
  • अर्थात कोहनियों और हथेलियों के बल पर शीर्षासन करते हुए दोनों पैरों के पंजों को दीवार पर टिकाना है|
  • अब सिर को उठाने का प्रयास करे और दीवार की ओर देखे |
  • फिर दूसरी ओर पैरो को दीवार के सहारे जहाँ तक संभव हो खिसकाते जाएँ|
  • इस स्थिति में बीस सेकंड तक रुके फिर सामान्य स्थति में आ जाएँ|
  • इस योग का अभ्यास करते रहने से कुछ वक्त के बाद पैरो के पंजे पूरी तरह से सर पर टिक जाते हैं|

वृश्चिकासन के फायदे

  1. वृश्चिकासन चेहरे की सुंदरता को बढ़ाता है। इसके नियमित अभ्यास से मुख की कांति में वृद्धि होती है।
  2. वृश्चिकासन को करने से पेट संबंधित रोग को दूर हो जाते है और पाचन क्रिया बढ़ती हैं, जिससे भूख में वृद्धि होती है।
  3. इस आसन के अभ्यास से मूत्र संबंधित विकार भी दूर हो जाते हैं। जैसे मूत्र का बाधित हो जाना, पेशाब में जलन आदि|
  4. इस आसन को करते समय शरीर का बैलेंस बनाना पड़ता हैं जिससे शरीर के हर अंग में खिचाव होता हैं इस कारण शरीर के हिस्सों में मजबूती आती हैं|
  5. इस आसन को प्रतिदिन करने से रीढ़, कोहनी, कंधे, छाती, गर्दन और पेट में खिंचाव होता है।
  6. जिन लोगो को ज्यादा तनाव रहता हैं और सदैव मूड ख़राब रहता हैं उन्हें यह आसन जरूर करना चाहिए, इससे उनकी यह समस्या दूर हो जाएगी |

वृश्चिकासन को करते समय सावधानियां

  • इस आसन का अभ्यास करते समय, इसे बिना दीवार के सहारे के ना करे।
  • इसे करते समय एक बार में सिर्फ बीस सेकंड ही इस स्थिति में रुके।
  • जिन लोगों को ब्लडप्रेशर, टीबी, अल्सर, हृदय रोग और हर्निया जैसे रोग है वे इस आसन को न करें।