Yoga Dance in Hindi: योग के साथ ले नृत्य का भरपूर आनंद

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Yoga Dance in Hindi: योग के साथ ले नृत्य का भरपूर आनंद

भारत में योग का अभ्यास प्राचीन काल से ही चला आ रहे है। आपको बता दे कि योग के जितने प्रकार होते है उसके उल्टे ही फायदे भी होते है। योग के अभ्यास को बढ़ाने के लिए इस आधुनिक युग में योग को कई तरीकों से किया जाने लगा है।

जिसमे एक्वा योगा, बकरी योगा, बीयर योगा आदि प्रमुख है जिसमे लोगो का मनोरंजन के साथ - साथ योग भी हो जाता है।

ऐसा ही एक योग है डांस योगा जो भरपूर मनोरंजन तो प्रदान करता है साथ ही योग के लाभ भी देता है।

नृत्य भी हमारी प्राचीन सभ्यता में शामिल है। यह हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर भी है। नृत्य को यदि भरपूर आनंद के साथ किया जाए तो यह मन को शांत करता है और मन प्रसन्न भी रहने लगता है। जानते है Yoga Dance in Hindi.

Yoga Dance in Hindi: जानिए नृत्य और योग की विशेषता व् इसके लिए योग

Yoga Dance in Hindi

नृत्य और योग की महत्ता

  • योग एक शारीरिक व्यायाम होता है जो कि शरीर को स्वस्थ रखता है और रोगों से दूर रखने में मदद करता है। साथ ही मन को शांत रखने का कार्य भी करता है।
  • नृत्य एक प्राचीन तकनीक है जो नर्तक को भाव भंगिमाओं की अभिव्यक्ति की कुशलता प्रदान करने में मदद करती है।
  • इसके अभ्यास से शरीर में लचीलापन आता है और शरीर आकर्षक बनता है।
  • यदि नृत्य के साथ योग को किया जाए तो यह मन को शांत और प्रसन्न रखने के साथ - साथ शरीर को फिट रखने का कार्य भी करता है।

नृत्य में सहायक आसन

योग के आसन करने से एक नृतक को नृत्य करने में काफी आसानी होती है साथ ही वह सरलता पूर्वक कठिन से कठिन स्टेप्स को भी आसानी से कर पाता है। जानते है वह कौन कौन से आसन है तो नृत्य की दृष्टि से लाभकारी होते है।

शवासन

  • इस आसन को लेटकर किया जाता है। इसमें शरीर की स्थिति एक मृत शरीर के सामान हो जाती है इसलिए इसे शवासन कहा जाता है।
  • शवासन को करने से मन पूर्ण रूप से मन और प्रफुलित रहता है। तनाव से मुक्ति मिल जाती है जो एक नृतक के लिए बहुत ही लाभकारी होती है।

त्रिकोणासन

  • त्रिकोणासन का अभ्यास करने से घुटनों, टखनों, टांगों, छाती और भुजाओ को मजबूती मिलती है। जो एक नृतक के लिए ज़रुरी होता है जिसके कारण वह अच्छे से नृत्य कर पाता है।
  • मांसपेशियों को आराम देता है और जकड़न को भी दूर करता है।

पूर्वोत्तानासन

  • यह आसन कलाइयों, कन्धों, भुजाओं, पीठ व् रीढ़ के लिए अच्छा होता है। इस आसान के अभ्यास से इनको मजबूती प्रदान होती है।
  • पैरों व् कूल्हों के लिए भी यह लाभकारी आसन होता है।

उत्कटासन

  • इस आसन द्वारा नर्तक को शारीरिक बल की प्राप्ति होती है साथ ही उसके मन की संकल्प शक्ति में भी वृद्धि होती है।

अधोमुख श्वानासन

  • इस आसन को करने से सम्पूर्ण शरीर को शक्ति प्राप्त होती है। जो एक नृतक के लिए आवश्यक होता है। वह एनर्जी के साथ ही नृत्य कर सकता है।
  • मांसपेशियों को बल प्रदान करता है और थकान व सिरदर्द से भी निजात दिलाने में मदद करता है।