Yoga for Jaundice: पीलिया रोग को दूर करने के लिए योगासन

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पीलिया की समस्या को अंग्रेजी में जॉइंडिस कहा जाता है। आमतौर पर यह बीमारी हेपेटाइटिस ए वायरस की वजह से होती है जो दूषित या संक्रमित खानपान से फैलता है। साथ ही कुछ बीमारियां जिनमें लिवर पर असर पड़ता है, उसमें भी पीलिया हो सकता है।

इस रोग के होने पर मरीज की त्वचा और आँखे पिली हो जाती है और शरीर भी बहुत कमजोर पढ़ जाता है। इसके अलावा इसके अन्य लक्षण है बुखार, थकान, भूख की कमी, वजन में कमी, मतली, पेटदर्द, कब्ज, सिरदर्द, गहरे रंग का मूत्र, शरीर में जलन आदि।

वैसे तो मरीज की आँखों को देखकर ही डॉक्टर इस रोग को पहचान लेते है। लेकिन इसके बावजूद इसकी पुष्टि के लिए कुछ टेस्ट किये जाते है जैसे बिलीरुबिन टेस्ट, कम्पलीट ब्लड काउंट टेस्ट, हेपेटाइटिस ए, बी, सी आदि।

यह रोग किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकता है। यदि इस पर ध्यान ना दिया जाये तो यह गंभीर भी हो सकता है। इसलिए इसका जल्द उपचार करे, साथ ही जाने Yoga for Jaundice in Hindi.

Yoga for Jaundice in Hindi: योग से पाएं पीलिया रोग से निजात

Yoga for Jaundice in Hindi

पीलिया मुख्यतः लिवर की कमजोरी के कारण होता है इसलिए आज हम आपको ऐसे आसन बता रहे है जो आपके लिवर को स्ट्रांग बनाते है:-

कपालभाति प्राणायाम

कपालभाति प्राणायाम लिवर के स्वास्थ्य को ठीक करना है और जो लोग हेपेटाइटिस, जॉन्डिस आदि से परेशान है उनके लिए यह बहुत फायदेमंद है। यह लिवर की कार्य प्रणाली को भी सुधारता है।

कपालभाति प्राणायाम कैसे करे?

  • कपालभाति प्राणायाम को करने के लिए सबसे पहले सुखासन की मुद्रा में बैठ जाये।
  • अपनी रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखे।
  • अब नाक के दोनों छेड़ से सांस लें, जिससे पेट फूल जाए।
  • इसके पश्चात पेट को अंदर की ओर संकुचित करते हुए तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से साँस को बाहर फेंकें।
  • फिर वापिस से नाक के दोनों छिद्रों से साँस खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते है।
  • इस क्रिया को आप अपनी शक्तिनुसार 5 बार से 50 बार तक कर सकते है।
  • एक सिटींग में 50 बार से अधिक न करें। क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन

अर्ध मत्स्येन्द्रासन भी लिवर के लिए बहुत फायदेमंद आसन है। यह तनाव, गलत खानपान और दिनचर्या के चलते डैमेज हुए लिवर को ठीक करता है और मजबूत बनाता है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन के और भी कई फायदे आप लिंक पर क्लिक करके जान सकते है।

अर्ध मत्स्येन्द्रासन कैसे करे?

  • जमीन पर दरी बिछाकर पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएँ।
  • अपने दोनों पैरों को साथ में रखें, रीढ़ की हड्डी बिलकुल सीधी रेहनी चाहिए।
  • इसके पश्चात अपने बाएँ पैर को मोड़कर बाएँ पैर की एड़ी को दाहिने कूल्हे के पास रखें।
  • दाए पैर को बाएँ घुटने के ऊपर से सामने रखें।
  • बाएँ हाथ को दाए घुटने पर रखें और दाया हाथ पीछे रखें।
  • कमर, कन्धों व् गर्दन को दाए तरफ से मोड़े और दाहिने कंधे के ऊपर से देखें।
  • रीढ़ की हड्डी तनाव रहित और सीधी रहना चाहिए।
  • इसी अवस्था में कुछ सेकण्ड्स बने रहे और लंबी गहरी साधारण साँस लेते रहें।
  • इसके पश्चात साँस छोड़ते हुए,धीरे धीरे आसन से बाहर आ जाये।
  • अब दूसरी तरफ से भी इस प्रक्रिया को दोहराएँ।