Yoga for Menopause: रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में होने वाली समस्या को दूर करे

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Yoga for Menopause: रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में होने वाली समस्या को दूर करे

अधिकतर कन्याओं को 14 या 15 की आयु में मासिकधर्म प्रारंभ हो जाता है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। जिसका मतलब होता है कि कन्या गर्भधारण के योग्य हो गई है। और यह प्रक्रिया 45 से 50 वर्ष की आयु तक चलती रहती है।

इस उम्र के बाद यह अपने आप बंद हो जाता है| मासिक धर्म के स्थायी रूप से बंद हो जाने को रजोनिवृत्ति (Menopause) कहा जाता है। ऐसे में एक महिला के शरीर में मासिकधर्म से सम्बंधित हार्मोन बनना बंद हो जाता है।

रजोनिवृत्ति होने पर स्त्री के शरीर में शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के परिवर्तन हो जाते हैं। लेकिन महिला हार्मोन प्रजनन के अतिरिक्त, हड्डी चयापचय के विनियमन के लिए भी जरुरी होता हैं। इसी कारण रजोनिवृत्ति के दौरान कुछ महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है।

इसके अतिरिक्त कुछ महिलाओं को इसमें अनिद्रा और रजोनिवृत्त सिंड्रोम का भी खतरा हो सकता है।इन समस्याओं के निदान के लिए आप योग की मदद ले सकते है| आइये जानते है Yoga for Menopause.

Yoga for Menopause: रजोनिवृत्ति के लिए लाभकारी योगासन

Yoga for Menopause

मकरासन

  • इस आसन में शरीर मगरमच्छ के समान दिखता है। इसलिए इसे मकरासन कहा जाता है।
  • इस आसन को करने से रजोनिवृत्ति में होने वाली निंद्रा की परेशानी को दूर किया जा सकता है।

सुखासन

  • सुखासन का अर्थ होता है सुख देने वाला आसन। यदि आप चिंता, अवसाद या फिर क्रोध से ग्रस्त हैं,तो आप सुखासन कर सकते है।
  • क्यूंकि रजोनिवृत्ति के कारण कुछ महिलाओं में चिड़चिड़ापन और गुस्सा भी बना रहता है जो इस आसान से दूर हो जाता है।
  • साथ ही इसे करने से मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है।

चेयर पोज़

  • इसे उत्कटासन के नाम से भी जाना जाता है जिसमे उत्कट का मतलब होता है शक्ति शाली।
  • इस आसन को सभी उम्र के लोग कर सकते है लेकिन बुजुर्गो के लिए यह आसन बहुत ही महवत्पूर्ण होता है।
  • इसे करने से महिलाओं में मासिक धर्म से जुडी समस्या दूर हो जाती हैI

वारियर पोज़ II

  • इसे वीरभद्रासन भी कहते है। इसे करने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्या का निदान होता है।
  • वारियर पोज़ का नियमित अभ्यास रजोनिवृत्त सिंड्रोम के खतरे को कम करता है।
  • साथ ही यह शरीर सहन शक्ति को बढ़ाता है।

लोकस्ट मुद्रा

  • इसे शलभासना के नाम से भी जानते है।
  • यह आसन पाचन क्रिया के सुधार के लिए अच्छा होता है। कमर दर्द के लिए भी यह आसन महत्वपूर्ण है।

स्टैंडिंग फॉरवर्ड बेंड

  • इसे उत्तानासन या हस्तपादासन के रूप में भी जाना जाता है।
  • यह आसन रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम करने में बहुत ही महवत्पूर्ण होता है।
  • ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी को भी दूर करता हैI साथ ही इसे करने से सर में दर्द और अनिंद्रा से भी छुटकारा मिल सकता हैI

वशिष्ठासन

  • वशिष्ठासन को साइड एंगल पोज़ के नाम से भी जाना जाता है|
  • यह आसन शरीर के ऊपरी हिस्से जैसे छाती, पेट और कंधे को मज़बूत बनाता है और उसमे स्थिरता लाता है|
  • पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में भी यह सहायक होता है।
इसके अतिरिक्त हीरो पोज़ विथ आर्म रेज, सीटेड वाइड -एंगल पोज़ भी रजोनिवृत्ति से जुडी समस्या को दूर करने में मदद करता है|