Yoga for Pancreas: आसन जो बनाये अग्न्याशय को बेहतर

पैनक्रियाज जिसे आम भाषा में अग्न्याशय भी कहा जाता है। यह पाचन प्रणाली की ग्रंथी होती है। जिसके द्वारा भोजन को आसानी से पचाया जा सकता है।

अग्न्याशय एक प्रकार की मिश्रित ग्रंथि है जिसमे लैंगरहेंस की द्विपिकाएँ अन्तःस्रावी भाग में होती है। इंसुलिन हॉर्मोन इन ग्रंथियों में स्त्रावित होता है जो खून में शर्करा की मात्रा का स्त्राव करता है और बहिस्त्रावी भाग के जरिये अग्न्याशयी रस स्त्रावित करता है जो की खाने को पचाने में सहायक होता है।

अग्न्याशय को स्वस्थ्य रखना आवश्यक होता है नहीं तो मधुमेह, पेट दर्द, अग्न्याशय कैंसर जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। अग्न्याशय कैंसर की स्थिति अधिक गंभीर स्थिति होती है।

अग्न्याशय को सुचारु रूप से कार्य करने और स्वस्थ्य रखने के लिए योग का अभ्यास किया जा सकता है। योग के द्वारा शरीर को अन्य लाभ भी प्राप्त हो जाते है। इसके लिए जानते है Yoga for Pancreas के बारे में।

Yoga for Pancreas: अग्न्याशय को मजबूत बनाने के लिए करे यह आसन

Yoga for Pancreas in Hindi

अग्न्याशय के लिए कई योग का अभ्यास किया जा सकता है जिनमे से कुछ इस प्रकार है।  

मयूरासन

  • मयूरासन में शरीर की स्थित मोर के समान होती है जिस के कारण हीं इसे मयूरासन कहा जाता है।
  • इस आसन को नियमित करने से शरीर के पाचन अंगो में रक्त का प्रवाह सही रूप से हो पाता है।
  • पेट से जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए यह आसन बहुत ही उत्तम होता है।
  • मयूरासन को रोज करने से अग्नाशय, यकृत, गुर्दे, आमाशय आदि को लाभ प्राप्त होता है।

अर्धमत्स्येन्द्रासन

  • अर्धमत्स्येन्द्रासन भी अग्न्याशय के लिए बहुत ही लाभकारी आसन होता है
  • साथ ही यह पेट के अंगो को भी दुरुस्त करने का कार्य करता है।
  • अर्धमत्स्येन्द्रासन को करने से मधुमेह रोगियों को भी फायदा मिलता है।
  • लीवर से जुड़े रोगों के लिए भी यह आसन उत्तम होता है।

पश्चिमोत्तानासन

  • पाचन से सम्बंधित परेशानियों को दूर करने के लिए पश्चिमोत्तानासन करना लाभकारी होता है।
  • यह आसन पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है।
  • अग्न्याशय को स्वस्थ रखने के लिए इस आसन का अभ्यास प्रतिदिन करना अच्छा होता है।

गोमुखासन

  • इस आसन में शरीर और पैरों की मुद्रा गाय के समान होती है इसलिए इसे गोमुखासन कहा जाता है।
  • यह गुर्दे और यकृत को स्वस्थ रखने में मदद करता है। साथ ही अग्न्याशय को भी मजबूत बनाता है।
  • इस आसन द्वारा पैंक्रियाज को उत्तेजित किया जा सकता है साथ ही इसके अभ्यास से मधुमेह रोग को ही नियंत्रित कर सकते है।
  • गोमुखासन अस्थमा रोगियों के लिए भी लाभकारी होता है।

हलासन

  • इस आसन में शरीर की स्थिति खेत में चलने वाले हल के समान होती है।
  • अपच और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है साथ ही पेट से जुड़ी समस्याएं भी इस आसन द्वारा दूर हो जाती है।
  • यह आसन अग्न्याशय को सही रूप से कार्य करने में मदद करता है।
  • हलासन मधुमेह के रोगियों के लिए भी लाभकारी होता है।

उपरोक्त आसनो का नियमित अभ्यास करके आप अग्न्याशय में होने वाली हानि को कम कर सकते है ताकि इससे होने वाले रोगों से छुटकारा मिल सके। इसके लिए इनका नियमित अभ्यास करे।

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