स्कोलियोसिस को मेरुवक्रता भी कहा जाता है। यह रीढ की हड्डी की एक प्रकार की बीमारी है। इस रोग के होने से मेरुदण्ड सीधा नहीं हो पाता है और एक तरफ झुक जाता है।

इस रोग से ज्यादातर पीठ और छाती के नीचे का भाग ग्रसित होता है। इस तरह की बीमारी की सम्भावना महिलाओ में ज्यादा देखी जाती है।

खासकर स्कोलियोसिस का आरम्भ बाल्यावस्था या किशोरावस्था में ही हो जाता है। हालांकि इसके कारणों का सही पता नहीं चल पाया है। परन्तु यदि समय पर इसका उपचार नहीं हो पाता है तो शरीर में विकलांगता या विकृति उत्पन्न हो जाती है।

स्कोलियोसिस होने से व्यक्ति की गतिशीलता पर प्रभाव पड़ता है साथ ही इसमें दर्द भी होता है। स्कोलियोसिस होने पर लोग सर्जरी करवाते है। इसे योग के माध्यम से दूर किया जा सकता है। जानते है Yoga for Scoliosis के बारे में विस्तार में।

Yoga for Scoliosis: ये आसन करेंगे स्कोलियोसिस का निदान  

Yoga for Scoliosis in Hindi

त्रिकोणासन

  • स्कोलियोसिस रोगियों के लिए त्रिकोणासन बहुत लाभकारी होता है।
  • यह खड़े होकर करने वाले आसनों में से एक होता है ।
  • इस आसन के अभ्यास से रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है।
  • साथ ही यह कमर दर्द को भी दूर करने में मदद करता है।
  • इस आसन के नियमित अभ्यास से शारीरिक और मानसिक संतुलन बनता है साथ ही तनाव भी दूर हो जाता है ।

बालासन

  • इस आसन को बैठकर किया जाता है।
  • स्कोलियोसिस के लिए यह आसन बहुत ही असरकारी होता है।
  • यह आसन दिमाग को शांत रखता है साथ ही पीठ और रीढ़ की हड्डी को भी मजबूत बनाता है।
  • बालासन को करने से मेरुदंड लचीला और मजबूत बनता है। साथ ही साथ इसे करने से तनाव भी दूर हो जाता है।

मार्जरी आसन

  • जिन लोगो को स्कोलियोसिस की समस्या होती है उनके लिए यह आसन लाभकारी होता है।
  • यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है साथ ही वह इससे मजबूत भी बनती है।
  • इस आसन के द्वारा रक्त संचार भी सुचारु रूप से हो पाता है और मांसपेशियों को ताकत भी प्राप्त होती है।  
  • मार्जरी आसन के नियमित अभ्यास से मन को शांत किया जा सकता है व् पाचन से सम्बंधित समस्याएं भी इससे दूर हो जाती है।

अधोमुख श्वान आसन

  • इस आसन को करने से पूरे शरीर को मज़बूती मिलती है। साथ ही रीढ़ की  हड्डी की लंबाई में भी वृद्धि होती है।
  • अधोमुख श्वान आसन के द्वारा  रीढ़ की हड्डियों को आराम प्राप्त होता है साथ ही यह पीठ के नीचले, मध्य और ऊपरी भाग में होने वाले दर्द को भी कम कर देता है।
  • स्कोलियोसिस रोगियों को इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।

पश्चिमोत्तानासन

  • इस आसन को करने से चिंता और थकान की समस्या दूर हो जाती है।
  • पीठ के निचले भाग में खिंचाव लाने के लिए यह आसन उत्तम होता है।
  • स्कोलियोसिस रोगियों को इस आसन से लाभ प्राप्त होता है।
  • पश्चिमोत्तानासन के नियमित अभ्यास से शरीर की सारी माँसपेशियों पर खिंचाव होता है।
  • मेरूदंड को लचीला बनाने में भी यह आसन लाभकारी होता है।
उपरोक्त आसनों की सहायता से स्कोलियोसिस रोगियों को लाभ प्राप्त होता है। इन आसनों को यदि सामान्य व्यक्ति भी करे तो उसे स्कोलियोसिस की समस्या नहीं होगी।