Yoga Poses for Fever - यह आसन दिलाते है बुखार के लक्षणों से राहत

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Yoga Poses for Fever - यह आसन दिलाते है बुखार के लक्षणों से राहत

जब शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाये तो उस स्थिति को ज्वर या बुख़ार कहते है। कभी कभी बुखार मौसम के बदलाव के कारण आ जाता है। या फिर संक्रमण का दौर होने पर अधिकतर लोग बुखार से पीड़ित होते हैं।

मनुष्य के शरीर का सामान्य तापमान 37°सेल्सियस या 98.6°फैरेनहाइट होता है। जब शरीर का तापमान इस सामान्य स्तर से ज्यादा हो जाता है तो इस स्थिति को बुखार कहा जाता है|

बुखार के निवारण के लिए कुछ एंटीबायोटिक दवाओं का भी सहारा लिया जाता है। दवाओं से आराम मिल जाता है परन्तु दवाओं के सेवन से हमारे लिवर पर भी बुरा असर होता है।

यदि आप दवाओं का उपयोग किये बिना ही अपने बुखार को ठीक करना चाहते है तो आप योग को भी अपना सकते है। ऐसे कई योग अभ्यास है जो की बुखार को ठीक करने में लाभकारी है। आइये जाने Yoga Poses for Fever.

Yoga Poses for Fever: बुखार से राहत पाने का बेहतरीन तरीका

Yoga Poses for Fever

अनुलोम विलोम प्राणायाम

  • इसे नाड़ी शोधन प्राणायाम भी कहते है|
  • यह प्राणायाम शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है।
  • जिसके कारण बुखार जैसी समस्या नहीं होती है।
  • इस क्रिया द्वारा शरीर की सफाई होती है।
  • साथ ही यह आसन सर्दी से भी बचाता है।
  • मन को शांत और केंद्रित करने के लिए यह एक बहुत अच्छी क्रिया होती है|

कपालभाति प्राणायाम

  • कपालभाति प्राणायाम लगभग प्रत्येक बिमारियों को किसी न किसी तरह से रोकता है।
  • मस्तिष्क और तांत्रिक तंत्र को ऊर्जान्वित करता है।
  • यह आसन नाक के रास्ते को साफ करता है।
  • यदि किसी को नींद नहीं आती है तो वह भी प्रतिदिन 3 से 5 मिनट कपालभाति प्राणायाम करे तो लाभ मिलता है|

शीतली प्राणायाम

  • शीतली का अर्थ है शीतल, यह प्राणायाम पूरे शरीर को शीतल करता है।
  • यह प्राणायाम शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में सहायक होता है।
  • इसे करके गर्मी से निजात पायी जा सकता है।
  • इसके अतिरिक्त यह प्राणायाम मन को शांत करके शारीरिक शीतलता प्रदान करता है।
  • इसका नियमित अभ्यास करने से आप बहुत सारे परेशानियों से बच सकते हैं।

सर्वांगासन

  • इस आसन में शरीर के सारे अंगों का व्यायाम एक साथ होता है| इसलिए इसे सर्वांगासन का नाम दिया गया है।
  • इस आसन को करने से रक्त संचार सही रहता है साथ ही यह आसन ऊर्जा का स्तर भी बनाए रखता है।
  • इसे करने से एकाग्रता और बुद्धि मत्ता में वृद्धि होती है।
  • यह शरीर की दुर्बलता को भी दूर करता है।

मत्स्यासन प्राणायाम

  • इसे फिश योगासन भी कहते है।
  • यह आसन छाती को चौड़ाकर उसे स्वस्थ बनाए रखने में सक्षम होता है।
  • यह कब्ज की समस्या को भी दूर करता है|

विपरीत करणी मुद्रा

  • यह आसन तनाव को कम करता है, साथ ही शरीर की थकावट भी दूर करता है।
  • इसके नियमित अभ्यास से रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।